सतपथ दर्पण दिखलाऊँ

ना मै दलित कहाने वाला,ना मै हरिजन कहलाऊँ।
ये हूँ वो हूँ कहकर मिथ्या,ना ही मन को बहलाऊँ।
मानव मानव एक बराबर,था भी है भी और रहेगा,
संविधान श्रीमुख जीवन को सतपथ दर्पण दिखलाऊँ

-सुखदेव सिंह अहिलेश्वर
    गोरखपुर कबीरधाम

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